Brigadier Bedi highlighted the rally's comprehensive support system, including two ambulances, a team of doctors, and 45 support staff ready to provide assistance throughout the journey. IPS Ms. Geeta Rani Verma had previously flagged off the rally's start from DLF Avenue Mall in Delhi.
Last 20 years I was in entertainment PR, but that I had close down on 20 Nov 2016, now a full-time writer and film director, at the age of 56 taking the risk to change the track are not ingenious, but without the struggle, a tough task, challenges, I never enjoyed from starting of my professional life. Two books "I am not Guilty - Kasab" is published, and 2nd is "20 years of Entertainment PR" will release in 2020.
Wednesday, April 3, 2024
purple fire Women car rally 2024
Brigadier Bedi highlighted the rally's comprehensive support system, including two ambulances, a team of doctors, and 45 support staff ready to provide assistance throughout the journey. IPS Ms. Geeta Rani Verma had previously flagged off the rally's start from DLF Avenue Mall in Delhi.
अमेरिका में हिन्दी गानों का परचम फहराते भारत के गायक अयाज़ इस्माइल
मुंबई में जन्मे और अमेरिका में रह रहे गायक संगीतकार अयाज इस्माइल के नवीनतम एकल गाने तुझसे कहूं ने तेजी से दुनियां भर के दर्शकों के दिलों पर कब्जा कर लिया है
यूट्यूब पर तुझसे कहूं गाने को करीब 20 लाख से अधिक बार देखा गया है। यह मील का पत्थर न केवल गीत की व्यापक अपील को उजागर करता है बल्कि संगीत उद्योग में एक उभरते सितारे के रूप में अयाज़ की स्थिति को भी मजबूत करता है।
प्रेम के शाश्वत सार के साथ आधुनिक ध्वनियों का मिश्रण, तुझसे कहूं दुनिया भर के श्रोताओं के साथ गूंजता है, जो भौगोलिक सीमाओं से परे संगीत बनाने के लिए अयाज़ की प्रतिभा को प्रदर्शित करता है।
गाने की सफलता अयाज़ की अनूठी संगीत दृष्टि का प्रमाण है, जिसमें उन्होंने मुंबई में अपनी जड़ों को संयुक्त राज्य अमेरिका में अपने अनुभवों के साथ जोड़कर एक ऐसी ध्वनि तैयार की है जो ताज़ा और गहराई से प्रासंगिक दोनों है।
दृश्यात्मक रूप से आश्चर्यजनक संगीत वीडियो, जो तुझसे कहूँ की गीतात्मक कथा का पूरक है, ने ट्रैक की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जो दर्शकों को एक मनोरम दृश्य कहानी पेश करता है जो गीत के भावनात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।
अयाज़ का अपने प्रशंसकों के प्रति आभार और गाने के पीछे सहयोगात्मक प्रयास स्पष्ट है। कुछ ही हफ्तों में इस मुकाम तक पहुंचना एक सपने के सच होने जैसा है। यह हमारी टीम की कड़ी मेहनत और हमारे श्रोताओं के अविश्वसनीय समर्थन को दर्शाता है।
अयाज़ ने कहा, 'तुझसे कहूं' मेरे दिल का टुकड़ा है और मैं इसे इतने सारे लोगों के साथ जुड़ते हुए देखकर रोमांचित हूं। जैसे-जैसे तुझसे कहुं गति पकड़ रहा है, अयाज़ इस्माइल पहले से ही अपने अगले संगीत प्रयासों की योजना बना रहा है।
गाने की सफ़लता ने अगले गाने और संगीत को अधिक प्रभावशाली और लय बद्धता को खुद चुनौती दी है, अयाज़ अगले गाने कोअधिक कर्णप्रिय और सीमा पार भी पसंद आने वाले ट्रैक देने का वादा करते है।
तुझसे कहुं यूट्यूब पर देखने के लिए उपलब्ध है, जो अधिक दर्शकों को अयाज़ इस्माइल की सफलता का जश्न मनाने संगीत और भावनाओं के आकर्षक मिश्रण का अनुभव करने के लिए आमंत्रित करता है जिसने करीब 20 लाख से अधिक दर्शकों का ध्यान खींचा है।
Tuesday, January 9, 2024
Triumph Over Adversity: Kho Kho Captain Nasreen Shaikh Receives Arjuna Award
Sunday, April 30, 2023
10 दिन का मौन
10 दिवसीय मौन ध्यान
सोमवार 17 अप्रैल 2023 पहला दिन था 10 दिवसीय मौन का, प्रतिदिन की तरह 2.30 प्रातः उठा । ॐ ब्रह्मा मुरारी श्लोक कर ध्यान में बैठ गया 4 बजे तक चूंकि रात करीब 10.30 सोया था तो सोचा 15 मिनट सो लेता हूं थोड़ी देर बाद ही लगा अम्मा ने सिर पर हाथ फेराया बोली हरीश उठ जा पहला दिन है पूजा पाठ भी करना है। अम्मा दूर बहुत दूर गाजियाबाद में रहती है।उनके स्वास्थ के विषय में पूछने के बाद उठ गया।
पृथ्वी मां को प्रणाम कर जैसे ही पैर जमीन पर रखा मौन से आवाज आई हरे कृष्ण तभी ध्यान आया क्या कर रहे हो मौन व्रत है माफी मांग दैनिक कार्य सम्पन्न कर ब्रह्माण्ड के नीचे हाथ ऊपर कर प्रतिदिन की पूजा की।
भगवान को चरण स्पर्श कर प्रतिदिन की तरह मीनाक्षी ईहा कुल्फी अम्मा सुशील अक्षत गुड्डी परिवार दीदी परिवार बरेली ससुराल परिवार सभी रिश्तेदारों योग परिवार इस फ्लैट के मालिक दिवंगत नीलेश वर्तमान के मालिक गौरव और मीना चुग पूरे देश पूरे विश्व को प्रणाम कर सबके बेहतरीन होने की दुआ मांगी रोज की तरह।
रसोई में जाकर मां अन्नपूर्णा का आह्वान किया मां भण्डार भरा रहे सब स्वस्थ रहे। नहा कर पूजाकर मीनाक्षी के साथ पार्क जाने से पहले पार्किंग में कुत्तों को बिस्किट खिलाएं। पार्क पहुंचे।
मनीषा ने exercise करवाई। एकादशी के पहले व्रत के कारण उसकी तबीयत गड़बड़ हुई तो दूसरा शब्द मौन से निकला पानी पिलाओ कोई सुन नही पाया मेरे अलावा ।
हमारी साथी श्री का जन्मदिन था वो खुशी मनाई खजूर जूस बिस्किट खाया पिया लिया देर से सुनीता भल्ला जी आई तो निशा को लगा उन्हे जन्मदिन का कुछ देना चाहिए तब मौन से निकला दो और हमारी साथी प्रतिभा जी ने बोलते सुना।
घर आए कुल्फी को घुमाया घर आकर अखबार पढ़ा मैंगो शेक पिया पिछली रात बनाया था। नहाया, मीनाक्षी ने बताया मम्मी नाराज हो रही है गृहस्थी में रह कर अपनी ज़िम्मेदारी छोड़ कर साधु क्यों बन रहे है मेरे मौन से पुनः शब्द निकला क्या ? ईहा ने आकर प्रतिदिन की तरह प्रणाम किया उसे दिल से भरपूर आशिर्वाद दिया।
अमूमन मैं दिन में सोता नही हूं लेकिन आज शरीर से आवाज आई नींद ध्यान करो मैंने किया करीब एक घण्टे के ध्यान में पांच घण्टे की नींद पूरी की । जब उठा तो जो ऊर्जा थी वो अद्भुत थी।
कंप्यूटर खोल कर किताब लिखने बैठ गया वर्ष 2001 की फिल्मों से सम्बन्धित चैप्टर लिखकर खत्म किया अब दूसरे दिन 2002/3 खत्म करना है । एक समय भोजन किया बहुत ही साधारण और स्वादिष्ट भोजन था आलू की सब्जी रोटी बूंदी रायता लाल मिर्च आचार। ऐसा लगा मीनाक्षी ने सारा लाड़ खाने में परोस दिया है । गुड्डी सुशील अम्मा से वीडियो पर बात हुई मैं सुनता रहा ।
आज शाम का गीता जी पाठ नही हो पाया उसके लिए माफी, 8.45 पर कंप्यूटर बंद कर दैनिक कार्यों से मुक्त होकर शेक पिया भगवान जी को शुभरात्री कर मीनाक्षी रिनी कुल्फी को शुभरात्रि कर सो गया नींद की तो कोई दिक्कत होती नही सोने से पहले मन ही मन 11 बार ॐ नाद अनुलोम विलोम और 11 मिनट का ध्यान किया जैसा प्रतिदिन करता हूं। नींद आने में दो मिनट से अधिक लगते नही ।
2.30 बजे का अलार्म की पहली घंटी पर उठने का नियम है कभी आलस्य नही आता ध्यान कर कुछ पाठ कर यह लिखने बैठ गया नही लिखता तो कई चीजे भूल सकता था। शुभ प्रभात।
दूसरा दिन शुरु तो पहले दिन जैसे ही था लेकिन पार्क में 50/60 साथियों के बीच स्वयं को मौन रखना बहुत आसान नही है फिर भी 18 अप्रैल को पहले दिन की तुलना में मौन बेहतर रहा सिर्फ दो शब्द निकले। दोपहर बाद 4 बजे हमे अपने योग ग्रुप के लिए योग टी शर्ट बनवाने जाना पड़ा वहां एक शब्द निकला गर्मी ,उसके अलावा पूर्णतया शांति रही एक समय खाना खाया चूंकि सोम मंगल को व्रत होता है भोजन दोपहर में ही किया।
टी शर्ट वाले के यहां बहुत अजीब लगा मीनाक्षी और हमारे ग्रुप की साथी वैशाली साथ थी स्वाभाविक था मैं सब बाते इशारे और लिखकर कर रहा था वो सोच रहा होगा प्रकृति ने कितनी नाइंसाफी की है अच्छे खासे व्यक्ति को गूंगा बना दिया। ऐसा ही सब्जी वाले ने समझा होगा ।
जैसा बोला था किताब लिखने का सिलसिला जारी है कल 2002 में राज फिल्म के पीआर के दौरान पहली बार महेश भट्ट से हुई थी जो खास सम्बंध 2010 तक उनके साथ बने उनकी 14/15 फिल्मों का पीआर किया वही सब लिखा आज, 8 वर्षो का व्यवसायिक और कुछ हद तक व्यक्तिगत सम्बंध बहुत लम्बा समय होता है तो इस विषय पर लिखा भी खूब जाना है ।जल्द ही सो गया 2 - 3 मिनट में नींद आ गई । सपने मुझे आते नही, मुझे लगता है सपने आने का समय 2.30 बजे के बाद का होता है और मैं उस समय सोकर उठ जाता हूं। जो सपने में दिखना चाहिए वो सब meditation में एहसास हो जाता है।
Meditation के दौरान विचार शून्य होना अब मेरे लिए बहुत कठिन नही है, कठिन है गृहस्थ रहते हुए सब लोगो के बीच में मौन रहकर विचार शून्य होना ।
19 अप्रैल को सब कुछ सामान्य रहा आज पूर्णतया मौन रहा एक शब्द नही निकला। लगा आखिरकार मौन सफल होना शुरू हुआ । आज का दिन तो कुछ व्यक्तिगत कार्यों में व्यस्तता में व्यतित हुआ। आज बहुत अच्छा लग रहा है जैसे कुछ विशेष हुआ है।
आज छठा दिन है अब बदलाव मौन में यह आया है अब शब्द और विचार शून्य हो गए है, पहले तीन दिक्कत ये थी जीभ से शब्द निकलने को ललायित रहते थे शब्द न निकले सारा ध्यान इसी पर रहता था। अब शब्द निकलेंगे इसकी कोई संभावना नहीं है इसलिए ध्यान लगाने में अधिक आनन्द आ रहा है ।
यदि तुलना करूं मैं इगतपुरी के धम्मा गिरी विपासना से घर में रहकर सभी दैनिक कार्य करते हुए मौन में क्या अन्तर है। जैसा मुझे पता है वहां आपका मोबाइल लॉकर में रख दिया जाता है । हर तरफ मौन है वातावरण सभी साथी, एक दूसरे से नजर नहीं मिलाना, कोई योग व्यायाम नही करना लिखना पढ़ना या कोई नाद करना मना है। 4 बजे सुबह उठना 9 बजे करीब सोना सारे दिन करीब 9/10 घण्टे meditation करना।
वहां एक नियम है जिसे पालन करने में उन लोगो को शुरुआती दिक्कत आती होगी जो चार बजे नही उठते, जिन्हे लगातार ध्यान की आदत न हो।
घर में रहकर लगातार ध्यान करना थोड़ा कठिन है असम्भव नही सुबह 4 बजे उठना 9 बजे सोना तो आसान है, खानपान भी दिक्कत वाली बात नही है। मुझे ऐसा लगता है इगतपुरी में भी अवसर मिलने पर विपासना करना चाहिए और जो लोग वहां विपासना करके आते है उन्हे गृहस्थी में रहकर भी सभी दैनिक कार्य करते हुए मौन ध्यान करना चाहिए। दोनो अनुभव अद्भुत होंगे।
अब अपनी बात करूं, शुरू के तीन दिन चुप रहना कुछ ना बोलना सबसे कठिन तब था जब सुबह 50 महिलाओं को व्यायाम योग कराने की कवायद होती थी। जबकि मेरे साथ मनीषा और लक्ष्मी भी सहयोग करती थी। 40/50 योग अभ्यार्थी भी शान्त रहने की कोशिश करती थी लेकिन ऐसा करना आसान भी तो नही था। मैंने भी इसे चुनौती के तौर पर लिया और सब कुछ आसान हो गया।
रविवार को सुबह meditation class ईहा और मनीषा ने ली मैं पूरे समय meditation में चला गया करीब 1.20 मिनट, रविवार सोमवार अजीब बात हुई पूरा शरीर दर्द कर रहा था लेकिन वो routine दर्द नही था। मुझे लगता है कोई चक्र अनजाने में खुल गया है अपने आप शांत होना चाहिए नही हुआ तो कुछ लाभ होगा।
आमतौर पर मैं दिन में सोता नही हूं पहले बताया है रविवार को सोया सपना आया लाहौर के हनुमान जी के दर्शन हुए लिंक में पढ़िए http://harishsharma2017.blogspot.com/2023/04/blog-post.html
मौन को अब आठवां दिन है अब स्थिति ऐसी है कि कितने ही लोग इर्द गिर्द हो शब्द मौन है पहले दूसरे दिन शब्दों को रोकने के लिए संघर्ष करना पड़ा था अब शब्द शान्त हो गए है विचार शान्त है। आज शरीर में दर्द भी नही है। योग परिवार और परिवार मेरे पुनः बोलने का समय नज़दीक आने पर उत्साहित है लेकिन मैं शान्त हूं भगवान श्री कृष्ण के एक उपदेश को बहुत पहले आत्मसात् कर लिया समय कैसा भी हो एकसार रहना है।
जीवन चक्र में अच्छा बहुत अच्छा सबसे अच्छा समय आयेगा और बुरा बहुत बुरा और बहुत बहुत बुरा समय आता है लेकिन हमेशा दोनों समय में एक भाव एक सार रहने से बेहतर कुछ नहीं।
आज मौन का अंतिम दिन है रात 8.45 पर ही सो गया था सुबह उठा तो सिर कंधो में बहुत दर्द था लगा BP तो कम नही है ध्यान में जाकर ह्रदय की धमनियों को देखा ह्रदय को देखा धड़कन सुनी सब normal था इसका मतलब वजह कुछ और थी।
आधा घंटा ध्यान के बाद fresh n up के लिए गया मुंह आंखों पर करीब 25/30 बार पानी के छपाके मारे। मुंह पोछकर जीभ को निकालकर 30 बार right और 30 बार left घुमाया फिर 30 बार जीभ को बन्द मुंह में 30 बार right to left और 30 बार left to right चारो तरफ घुमाकर बाहर आया तबतक सिर और कंधों का दर्द गायब हो चुका था।
ब्रह्माण्ड और अन्य पूजा कर जब अपने कमरे में आकर ध्यान में बैठा तो वजह पता चल गई। वजह थी 10दिन से ॐ नाद ना करने के कारण वो दर्द हुआ था प्रति दिन 108 बार बोलकर ॐ नाद ना करने की एनर्जी तो निकल ही नही पा रही है ।
चार छह दिन तो शरीर ने बर्दाश्त किया आठवें नवे दसवें दिन ॐ ना बोलने ने अपनी शक्ति प्रदर्शित कर दी। दूसरी बात जैसा मैंने लिखा कोई चक्र open हुआ है मुझे लगता है कुछ दिन मुझे आज्ञा चक्र पर concentration करना चाहिए।
वैसे तो किसी भी चक्र के open होने से लाभ हानि होती है यह आपके शरीर और meditation की शक्ति और शान्ति पर निर्भर होता है चक्र कैसा reaction देते है ।
फिलहाल अब सिर शरीर में दर्द नही है । 10वें दिन सुबह पार्क में योग व्यायाम के लिए पहुंचे तो सभी साथी बहुत उत्साहित थे मैं कल बोलने लगूंगा। दिन में अम्मा बहनों भाई से बात हुई ।
अम्मा भी मौन से थोड़ा नाराज थी मीनाक्षी रिनी भी नाराज है परिवार के नाराज होने में कोई बुराई नही है। लेकिन मुझे तो मौन करना है आगे भी और परिवार को भी खुश रखना है।यह कैसे होगा, होगा, थोड़ा कठिन है लेकिन असम्भव नही। अब 10 दिन का मौन एक घण्टे में किया जा सकता है ध्यान से कुछ भी सम्भव है।
हकीकत में 40 दिन का मौन करेगें जब तमाम भौतिक ज़िम्मेदारी निबट जाएंगी । फिर मुझे लगता है ईश्वर की मर्जी कुछ भी सम्भव हो सकता है।
इस 10 दिवसीय मौन ने मुझे गुरु मंत्र दिया है वजह कुछ भी हो शान्त रहो चुप रहो किसी को भी सुनो तो अच्छा ग्रहण कर लो। इंसान हो कभी गुस्सा दुख सुख सब साथ चलेगा । गुस्से को दरकिनार करने की कोशिश करते रहीए सुख दुःख को बराबर समझने का प्रयास करते रहीए। श्री मद भगवद गीता को समझने की कोशिश भी करते रहीए।
11वें दिन सुबह 2.30 ध्यान करने के बाद 3.30 से 4.30 बजे तक ॐ नाद किया तो यकीन मानिए पूरे शरीर में नई स्फूर्ति आ गई। शरीर का सारा दर्द फुर्र हो गया। यह शक्ति है मौन और ॐ नांद की। मेरा आज्ञा चक्र पर ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास जारी है।
11वें दिन मीनाक्षी से हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे, हरे राम हरे राम राम राम हरे मंत्र के साथ मुलाकात हुई। पार्क में सबके साथ 10 दिन बाद बात करके बहुत अच्छा लगा। शाम को अम्मा, बहनों से बात हुई सभी आवाज सुनकर खुश हुई।
जैसी उम्मीद थी माता ने कहा अब कोई मौन नही अपनी जिम्मेदारियां खत्म करो फिर करना जो करना है । मैंने हां कहा यहीं सही है। मिलने जाना है जल्दी मां से।
फिर मिलते है जल्द। और हां किताब अभी खत्म नहीं हुई है। लिखना जारी है।
हरीश शर्मा
Sunday, April 23, 2023
लाहौर के हनुमान
लाहौर के हनुमान जी
मैं मीनाक्षी ईहा लाहौर में है भारत से गए है किसी रेस्टोरेंट में हमने लंच किया है। जब हम होटल पहुंचे मीनाक्षी को गैस बन गई।
उन्हे होटल के कमरे में छोड़कर मैं दवाई लेने निकला हूं।
होटल के पोर्च पर सिक्योरिटी वाले से पूछता हूं गैस हो गई है दवा लेनी है कोई मेडिकल शॉप है। सिक्योरिटी वाला होटल के सामने इशारा कर बताता है 145 नम्बर में मेडिकल की दुकान है चले जाएं।
सामने दरअसल ऐसा लगता है कोई बैरक रही होगी जिसके ऊपरी भाग में और नीचे छोटे छोटे कमरे है जिनमें अब दुकानें है । उस बाजार में जाने के लिए छोटे सफेद मटमेले रंग के तंबू है करीब 20 वहां पर हरेक entry पर एक दो सफेद सलवार सूट में सिक्योरिटी वाले है।
एक गेट से मैं अन्दर गया उस तम्बू से बैरक के बीच में करीब 25/30 मीटर की दूरी है बहुत खूबसूरत घास का मैदान और गुलाब के फूलों के पेड़ है।
जब 145 नम्बर पर जाने के लिए नीचे खड़े सिक्योरिटी वाले से कहता हूं वो इंटरकॉम पर दवाई पूछता है पता चलता है कोई दवाई गैस की नही है खत्म हो गई है।
जब वापस मुड़ता हूं तो right side में एक खूबसूरत इमारत है जिसके ऊपरी भाग में तिकोने बनी शेप है। दूर से देखता हूं वहां जाने का गेट है दरवाजे पर जय बजरंगबली लिखा है। मुझे आश्चर्य होता है। मेरी इच्छा वहां जाने की होती है उधर के लिए चलता हूं तो देखता हूं उस इमारत के ठीक सामने थोड़ी दूरी पर काले संगमरमर का चार पांच फीट का लम्बा और चौड़ा पत्थर लगा उस पत्थर पर हनुमान जी की उड़ते हुए वाली चित्रकारी उकेरी हुई है और उसे बहुत सहेज कर रखा गया है चमक ऐसी है की अभी अभी तेल से उसे चमकाया गया है ।
मैं आश्चर्य में मन ही मन प्रणाम करता हूं । मोबाइल से फोटो खींचना चाहता हूं तभी मुझे अपनी पिछली लाहौर यात्रा याद आ जाती है जब मैंने बाघा बार्डर पर पाकिस्तान वाली साइड में चिल्लाया था हिन्दुस्तान जिन्दाबाद। वो scene मैं create नही करना चाहता उस दिन तो कैलाश खैर साथ थे तो बच गए थे वरना अभी तक लाहौर जेल में होता।
अब मैं बाहर निकलने के लिए एक तंबू की तरफ जाता हूं तो देखता हूं तीसरे तम्बू पर रुहूहफजा जैसा शर्बत पीला रहे है ।मेरा मन उसे पीने का होता है उस तरफ जाता हूं उससे पहले वाले तम्बू के अंदर side में दो सिक्योरिटी वाले मोबाइल पर कुछ देख रहे है पास जाने पर देखता हूं उसमे एक को तो मैंने कपिल शर्मा के शो और अन्य कुछ शो में कॉमेडी करते देखा है। मैं उससे कहता हूं कैसे हो भाई जान वो बिना सिर उठाए हाथ हिलाकर कहता सब ठीक। बाद में गूगल में search करने पर पता चलता है वो मालिक नसीम विक्की है।
जब शरबत वाले तम्बू पर पहुंचता हूं तो एक सिक्योरिटी वाला पूछता है शर्बत पीना है मैं हां बोलता हूं तो वो कहता है मैं आपको दो शर्बत का कूपन दे रहा हूं क्योंकि आप उस इशारा कर कॉमेडी वाले के तरफ कर जोकर को जानते हो।
मैं कूपन लेकर तम्बू के गेट पर देता हूं वो मुझे एक गिलास में लाल सा शर्बत देता है मैं गिलास को देखता हूं पीने के लिए मुंह की तरफ बढ़ाता हूं तभी मेरे मोबाइल का अलार्म चीख मार देता है मेरी आंख खुल जाती है । शर्बत पीना रह जाता है। हाथ मुंह धोकर लिखने बैठ जाता हूं क्योंकि सपनो की मियाद बहुत लम्बी नही होती।
आमतौर पर मैं दिन में सोता नही हूं लेकिन आज श्रीमद् भागवत गीता पाठ सुनकर आने के बाद शरीर बोला एक घण्टा सो लो और मैं सो गया अमूमन मुझे सपने भी नही आते लेकिन यह सपना आया याद भी रहा।
हरीश शर्मा
Saturday, December 31, 2022
हमारा पार्क पलावा गैंग
हमारा पार्क पलावा गैंग
जीवन में कुछ नया खोज रहा था बड़ी monotonous हो रही थी life, 2022 के शुरू में गोआ से shift हुए थे पलावा में अपने मित्र अजीत कोहली के suggestion पर, फरवरी से अक्टूबर अन्त तक बमुश्किल 10 लोगो से परिचय हुआ था।मैं, मीनाक्षी अजीत
पलावा सिटी यूरोपियन या इटालियन type बहुत खूबसूरत township है बहुत खूबसूरत पार्क है बहुत बड़ा भी, ओस से भरी घास के करीब पांच छ मैदान है। प्रतिदिन सूरज को उगते देखते है पूजा करते है । सामने ही तालाब है तालाब के पार खेती करते किसान है।
अपने आप को fit रखने के लिए जिम का सदस्य हो गये हम मीनाक्षी सुबह जिम जाती मैं शाम को। छह महीने बाद सदस्यता खत्म हो गई तो हमने सोचा कुछ दिन जिम की बजाय पार्क में डेरा जमाते है। मीनाक्षी उस पार्क में गई थी उन्हे वो बहुत अच्छा लगा था।उनकी सलाह पर एक दिन सुबह उस पार्क में गया। अपनी भागादौड़ी के बाद exercise कर रहा था side में तीन महिलाएं exercise कर रही थी । मैंने उन्हें कुछ correction बताएं।
यह अक्टूबर end ki बात होगी। अगले दिन वो तीन महिलाएं लीला जी, कमला जी और पुष्पा जी पुनः मिली बोली भाई आप हमें exercise करा सकते है क्या । मैं तैयार हो गया।
उस दिन से जो सिलसिला प्रारम्भ हुआ वो बदस्तूर चालू है। थोड़े दिनों में महिलाओं की संख्या 10 हो गई फिर 20 फिर 30 इस तरह यह numbers बढ़ते रहे। आज हमारे इस ग्रुप जिसे हमने नाम दिया पलावा पार्क गैंग।महिलाओं बेटियो की संख्या आज करीब 50 का आंकड़ा पार कर लिया है। यह संख्या बढ़ती जा रही है। 50/60 महिलाएं नही 50/60 परिवार मेरे से, आपस में जुड़ गए। नई जगह वो भी मुंबई में इतने लोगो का आना मिलना सरल बात नही है। हर जातपात के लोग विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले लोग सरल लोगो का हिस्सा हूं मैं।
लगातार running exercise योग करने का लाभ भी सबको मिला है। किसी के घुटनों का दर्द कंधो का दर्द मानसिक शारीरिक दिक्कतें दूर हुई है हो रही है। इन सबको लागतार अभ्यास करने से मुझे भी बहुत कुछ सीखने को मिला है। मैं physically पहले से अधिक चुस्त दुरूस्त हुआ हूं। Memory sharp हुई है। करीब सबके नाम मुझे याद है। इतने लोगो के नाम याद रखने का आश्चर्य मुझे भी होता है।
इतने बड़े ग्रुप में कभी किसी का जन्मदिन शादी की सालगिरह होना। किसी का दादी नानी बनना स्वाभाविक है किसी को इतने सारे लोग happy birthday बोले गाए तो खुशी अद्भुत होती है रूबरू होकर और फेसबुक पर बधाई देने में बहुत फर्क है।
हमने एक दिन शाम को उसी पार्क में पिकनिक भी मनाई। सब अपने अपने घरों से खाने पीने का सामान लेकर सजधज कर पार्क पहुंचे। सब इतना खाना लाए कि हम सबने जी भरकर खाया इतना खाया कि रात्रि भोज की जरूरत नही पड़ी।
अब हाल यह है कि उन महिलाओं का गुरुजी,Sir और जैसे हर मर्ज की दवा मैं। अब जिम्मेदारी मिल गई तो निभानी तो पड़ेगी। यकीन मानिए जो लोग पहले दिन किसी exercise को नही कर पा रहे थे अब वो same exercises बिना किसी दिक्कत के कर रहे है। अब हम तीन दिन योग और तीन दिन physical exercise running आदि करते है।
कमला जी को पोता हुआ तो वो एक दिन खुशी में गाड़ी भरकरसुबह के नाश्ते के पैकेट ले आई। यह स्नेह मोहब्बत आशीर्वाद एक साथ कहां मिलेगा।
अब सब महिलाएं इतनी चुस्त दुरुस्त हो गई है कि उनको उनकी fitness को देख दिल बाग बाग हो जाता है। मुझे नई नई exercises और योग ढूंढने पड़ते है जिससे सबको Verity मिले।
मैं दिल से इन सभी महिलाओं का शुक्रगुजार हूं जो इन सबने मुझे मौका दिया कि समाज के लिए कुछ कर पाऊं।
मुझे पूरी उम्मीद है नए वर्ष के पूर्वाध में ही हमारा यह ग्रुप 100 की संख्या पार कर लेगा। 100 लोग यानि 100 परिवार की शक्ति हमारे साथ होगी।
सबको नववर्ष की पूर्व संध्या पर बहुत शुभ कामनाएं। नववर्ष शुभम्
हरीश शर्मा
Monday, December 26, 2022
और वो लड़का गायब हो गया।
कार पार्किंग में वो लड़का गायब हो गया
आज 6.30 बजे थे सुबह के, जब मैं पार्किंग में कार लेने पहुंचा। Ear plugs के माध्यम से हनुमान चालीसा का पाठ मोबाइल यूट्यूब पर सुन रहा था।
मेरी गाड़ी 15/20 की दूरी पर थी जब मैंने एक लड़के को अपनी गाड़ी से पहले वाली गाड़ी साफ करते देखा। वो लड़का सांवला सा मैरून रंग का कुछ पहना था उसने एक कपड़ा सिर पर बांध रखा था।
रोज ही एक दो लड़के कारे साफ करते है तो कोई नई बात नही थी मेरे लिए, लेकिन जब मैं मुुश्किल से अपनी गाड़ी से तीन चार सेकंड की दूरी पर, तभी खट की आवाज के साथ मैंने सुना कौन है की आवाज आई और मेरी आंखों के सामने वो लड़का गायब हो गया। मुझे आश्चर्य हुआ ।
मैं अपनी गाड़ी पर गया अपनी योग मैट, पानी रखा गाड़ी में। मन में विचार घुमड़ रहे थे। मैं रोक नहीं पाया उन तीन गाड़ियों के पीछे गया वो लड़का कहीं वहां हो लेकिन कोई नही था।
उसी जगह जहां वो लड़का खड़ा था खड़े होकर प्रभु को याद किया। आत्मा मुक्ति की प्रार्थना की।
अपनी कार लेकर चल दिया रास्ते में सोच रहा था यह अजीब घटनाए मेरे साथ ही क्यों होती है। खासकर जब से अध्यात्म के प्रति अत्याधिक रुझान हुआ है। अब इन सब घटनाओं से डर नही लगता। हैदराबाद के तो कई किस्से है कभी साझा करूंगा।
एक तो बताता हूं वहां जिस पार्क में मैं दौड़ने जाता था मेरे साथ ही कभी एक कभी दो लोग दौड़ते थे दिखते नही थे। लेकिन उनके पदचापो की आवाज स्पष्ट सुनाई देती थी। मैं हल्के दौड़ता तो वो भी हल्के दौड़ते तेज दौड़ता तो तेज दौड़ते चूंकि मुझे उनसे और उन्हें मुझसे कोई दिक्कत नही थी मैंने वैसा होने दिया।
ऐसे तमाम किस्से साझा करूंगा समय समय पर।
हरीश शर्मा


