Last 20 years I was in entertainment PR, but that I had close down on 20 Nov 2016, now a full-time writer and film director, at the age of 56 taking the risk to change the track are not ingenious, but without the struggle, a tough task, challenges, I never enjoyed from starting of my professional life. Two books "I am not Guilty - Kasab" is published, and 2nd is "20 years of Entertainment PR" will release in 2020.
Wednesday, October 7, 2020
पहली डिजीटल जिंगल प्रतियोगिता कैलाश खेर के साथ
Saturday, September 5, 2020
यह हाथ क्या कहता है
Tuesday, September 1, 2020
सन्तान रेखायें
हस्तरेखा ज्ञान
सन्तान रेखा
सन्तान रेखा के लिये आमतौर पर विशेषज्ञ चन्द्र क्षेत्र जो शुक्र क्षेत्र के सामने होता है के अंत मे देखते है लेकिन आप पहले मणि बंध के बीच मे जीवन रेखा के पास की लाइन देखे साथ ही अँगूठे की जड़ में शुक्र पर्वत और बुद्ध पर भी देखे।
तीन या कम से कम दो स्थान पर एक सी रेखा अवश्य होगी। यदि रेखा पतली और लम्बी है तो कन्या जन्म की संभावना है छोटी साफ सुथरी गहरी रेखा हो तो पुत्र की संभावना है
तीनों या दो स्थानों पर जितनी स्पष्ट रेखायें हो उतनी ही संतान होने की संभावना होती है।
जीवन रेखा यदि शुक्र पर्वत का विस्तार करती हो तो सन्तान होने के शुभ संकेत है।
बुद्ध क्षेत्र यानि सबसे छोटी उँगली के नीचे की रेखाएँ भी सन्तान के विषय मे जानकारी देती है। सूक्ष्म रेखाओं को मैग्निफाइंग ग्लास से देखना सटीक जानकारी देने में सहायक होता है।
दोनों हाथ देखने चाहिये जिससे रेखाओं की स्थिति साफ हो सके।
Tip - रात को सोते समय पूर्ण दिन को धन्यवाद कहे आज का दिन बेहतर था कल का दिन बेहतरीन होगा ।
ॐ
हरीश शर्मा
Friday, August 28, 2020
शुक्र पर्वत का महत्व
हस्तरेखा ज्ञान
शुक्र पर्वत का महत्व
हाथ में जितनी रेखाएँ है पर्वत है सब में बदलाव होते रहते है।
किसी का भी हाथ हो यह अवश्यम्भावी है। हथेली में सात पर्वत होते है। सूर्य पर्वत, चन्द्र पर्वत, मंगल पर्वत, बुध पर्वत, गुरु पर्वत, शुक्र और शनि पर्वत।
आज शुक्र पर्वत की बात करते है। शुक्र पर्वत अँगूठे के निचले भाग को कहते है।
शुक्र पर्वत सुविकसित हो यानि न बहुत उभरा न बहुत दबा तो ऐसे व्यक्ति सुख सम्पन्नता, उत्तम स्वास्थ्य, स्त्री पुरुष के बीच समुधर संबंध होते है। संगीत कला में व्यक्ति की रुचि होती है। भावनात्मक संबंध, सरल मन विचार, दुसरो को मदद सहयोग करने वाला, भावुक होते है।
यदि शुक्र क्षेत्र विकसित न हो, सख्त हो तो व्यक्ति कठिन कार्य करने वाला होगा, साथ ही व्यभिचारी, कठोर, असंयमी और रूखा बोलने वाला होगा। ऐसे में यदि हथेली का रंग पीलापन लिए हो तो ऊपर लिखे अवगुण में इजाफा होता है।
यदि शुक्र क्षेत्र अत्याधिक विकसित हो तो व्यक्ति आराम तलब, आलसी, सैक्स के प्रति बहुत अधिक रुचि जिसके अंतर्गत वो गलत कदम उठाने से भी संकोच नही करेंगे। ऐसे में यदि हथेली का रंग लाल हुआ तो ऐसे व्यक्ति कामवासना के प्रति बहुत खतरनाक हो सकते है।
आमतौर पर शुक्र पर्वत आकर्षक दिखने वाला व्यक्ति सौन्दर्य प्रेमी होता है किसी भी स्थान पर सौंदर्य खोज लेते है। सुविधा संपन्न जीवन प्रेमी होते है।
यदि शुक्र पर्वत पर स्पष्ट खड़ी रेखायें हो तो व्यक्ति कई विदेश यात्रायें अवश्य करेगा। आमतौर पर विदेश यात्रा के लिए चन्द्र पर्वत की रेखाओं को देखा जाता है पर मेरा अनुभव कहता है कि शुक्र पर्वत भी विदेश यात्रा के लिए महत्वपूर्ण है।
जन्मपत्री में मजबूत शुक्र हो तो व्यक्ति फैशन, पर्यटन, कम्प्यूटर, हस्तशिल्प, सिनेमा, संगीत, कला, ज्वैलर्स व्यापार, जनसंपर्क, रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में रोजगार या व्यापार में जाने की संभावना अधिक होती है।
Tip - सिर दर्द होने पर गर्म पानी पिये, नाक के एक छिद्र को दबाकर 15 बार फिर दूसरे छिद्र से 15 बार फिर 11 बार साधारण अनुलोमविलोम करे सिर दर्द गायब।
हरीश शर्मा
Tuesday, August 25, 2020
हस्तरेखा ज्ञान हाथ की रेखाएँ
हस्तरेखा ज्ञान
हाथ की रेखायें
आज जानेंगे हाथ की मुख्य रेखाओं के विषय में। आमतौर पर हम सभी हाथ की चार रेखायें तो जानते ही है।
1 जीवन रेखा
2 मस्तिष्क रेखा
3 ह्रदय रेखा
4 भाग्य रेखा
इन चार महत्वपूर्ण रेखाओं के साथ 10 अन्य महत्वपूर्ण रेखाएँ होती है उनको भी जानना जरूरी है लेकिन आज हम चार रेखाओं की ही बात करते है।
1 जीवन रेखा को पितृ रेखा और कुल रेखा भी कहते है यह रेखा अँगूठे और हाथ की पहली उँगली जिसे तर्जनी कहते है के बीच से निकल कर अर्धचंद्राकार रूप लेकर हथेली के बीच से होती हुई हथेली की जड़ तक जाती है। जितनी अधिक गोलाई और साफ सुथरी जीवन रेखा उतना ही साफ सुथरा जीवन। विस्तार से फिर चर्चा करेंगे पहले रेखाएँ जान लेते है।
2 मस्तिष्क रेखा को शीर्ष और मानस रेखा भी कहा जाता है लेकिन मस्तिष्क रेखा ही प्रचलित है। यह रेखा अँगूठे और तर्जनी के बीच से जीवन रेखा के साथ निकल कर ह्रदय रेखा के नीचे और जीवन रेखा की तरफ थोड़ा सा झुकाव लिये होती है।
जितनी सुन्दर साफ सुथरी और लम्बी मस्तिष्क रेखा होगी व्यक्ति उतना ही बुद्धिमान और शुद्ध मन होगा। विस्तार से चर्चा करेंगे
3 ह्रदय रेखा नाम से प्रचलित इस रेखा को आयु रेखा नाम भी दिया गया है। मुख्य रेखाओं में हथेली में सबसे ऊपर वाली रेखा जो सबसे छोटी उँगली के नीचे से निकल कर पहली उँगली तर्जनी के नीचे तक जाती है ह्रदय रेखा कहलाती है। रेखा की स्पष्टता देखकर आप अंदाज लगा सकते है कि हरेक ह्रदय कुछ कहता है। विस्तार से चर्चा करेंगे।
4 भाग्य रेखा जिसे शनि रेखा भी कहते है में हरेक व्यक्ति की रुचि सबसे अधिक होती है। शनि यानि कर्म, मेहनत, गाना है न जैसा कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान यह है गीता का ज्ञान। भाग्य और कर्म एक दूसरे के पूरक है। लेकिन अच्छे कर्म बेहतर भाग्य बनाते है यह निश्चित है।
विस्तार से चर्चा करेंगे प्रत्येक रेखा की उनके फल की। पहले आप सारी रेखाएँ तो समझ लीजिये।
Tip - ध्यान शुरू कीजिए बहुत आसान है सुबह उठने के बाद और रात सोने से पहले बिस्तर पर बैठ कर सिर्फ एक मिनट आँखे बंद कीजिये। आने दीजिये अच्छे बुरे विचारों को बस आँखे मत खोलिये, धीरे धीरे समय बढ़ता जायेगा विचार कम होते जायेंगे।
शुरू कीजिये शीघ्र ही आनन्द आने लगेगा।
कल मिलते है।
नोट - सभी चित्र सौजन्य पुस्तक हस्तविचार से।
हरीश शर्मा
Sunday, August 23, 2020
हस्तरेखा ज्ञान
हस्तरेखा ज्ञान
सामुद्रिक शास्त्र यानि हस्तरेखा वास्तव में समुद्र जितना गहरा है लिहाजा हमारा साथ लम्बा होने वाला है।
आज बात करते है हाथ की मुद्राओं की सरल आसान लाभदायक
अनामिका मुद्रा
अनामिका मुद्रा जिसे रवि मुद्रा भी कहते है। अनामिका यानि सबसे छोटी उँगली के बाद वाली उँगली उसको मोड़िये अँगूठे से दबाये हथेली के बीच मे जितनी देर आराम से दबा कर रख सके रखिये शेष उंगलियों को सीधा रखें ।
इसका लाभ होगा यदि आप tension, stress में है या मोटापा कम करना चाहते है आराम से बैठकर करिये जो लोग जमीन पर बैठ सकते है बैठकर करे नही तो जैसे कर सकते है करे जरूर, 1 मिनट 2,3,4,5,10 मिनट तक । कोशिश करे कि जिस स्थान पर करें गर्मी न हो। करने में दिक्कत महसूस हो तो न करे।
ईहा मुद्रा
ईहा मतलब पृथ्वी भूमि जमीन मुद्रा, वज्रासन में करेंगे तो लाभ अधिक होगा नही बैठ पाये तो जैसे आसानी हो करे। अनामिका यानि सबसे छोटी के बाजू वाली उँगली और अँगूठे के tip को मिलाये बाकी उंगलियां सीधी रखे। जितनी देर आसानी से कर पाये करे लेकिन 15- 20 मिनट से अधिक न करे।
इस मुद्रा से तुतलाना, हकलाना, बोलने में संकोच होता हो, weakness हो lazy feel कर रहे हो,पाचन सही न हो में लाभ मिलता है।
जीवन मुद्रा
जीवन यानि प्राण, life इस मुद्रा में आराम से बैठ जाये जमीन पर या जहाँ सुविधा हो। कनिष्ठ यानि सबसे छोटी और अनामिका मतलब उसके बाजू वाली अब इन दोनों उँगली को मिला ले और अँगूठे से दोनों उँगली के नाखून वाले भाग को हल्के से दबाये, बाकी दोनों उँगली सीधी रखे।
Heart blockage, आँखों के रोग, concentration करने में परेशानी हो, भूख पर नियंत्रण न हो तो यह मुद्रा करे तो लाभ मिलेगा।
Tip - पहले दिन मैंने सलाह दी थी 11 बार ॐ और अनुलोम करने की उसमे यह जोड़ लीजिये कि रात को दोनों प्रक्रिया करते समय वज्रासन में बैठ कर करिये इससे अतिरिक्त लाभ होगा पाचन क्रिया सही रहेगी साथ ही एकाग्रता में विकास होगा।
हरीश शर्मा