Wednesday, October 7, 2020

पहली डिजीटल जिंगल प्रतियोगिता कैलाश खेर के साथ

पहली डिजिटल जिंगल गायन प्रतियोगिता
विजेता को 2 लाख रुपये का इनाम 
कैलाश खेर के साथ वीडियो में गाने का मौका

कोविड 19 ने दुनियां भर को हैरान परेशान कर रखा है लेकिन ऐसी विषम परिस्थितियों में भी कुछ नया करने का जुनून बाकी है इसी कड़ी में नॉरिश फूड ने ईजाद की है पहली डिजिटल जिंगल गाने और बजाने की प्रतियोगिता। विजेता को मिलेगा 2 लाख रुपये का ईनाम, नॉरिश फूड गिफ्ट हैम्पर साथ ही पदमश्री गायक कैलाश खेर के साथ गाने और विडियो में दिखने का मौका। प्रतियोगिता में निशुल्क भाग ले सकते है।इस प्रतियोगिता को तीन भागों में बांटा गया है पहले भाग में 6 से 10 वर्ष, दूसरे भाग में 11 से 14 वर्ष और तीसरे भाग में 15 से 18 वर्ष उम्र के प्रतियोगी भाग ले सकते है।

प्रतियोगिता के अनुसार कैलाश खेर द्वारा गाये न्यूट्रिशन की सरगम गाने को प्रतिभागियों को अपनी आवाज में गाना है या  वाद्य यंत्रों से भी सुर दिये जा सकते है । प्रतिभागियों को अपने गाने या वाद्य यंत्र पर बजाए गाने का वीडियो प्रतियोगिता में शामिल करने के लिए ऑनलाइन भेजना होगा।

प्रतिभागी इस एंथम गीत को नॉरिश की वेबसाइट www.nourishstore.co.in या सोशल मीडिया चैनल के साथ कैलाश खेर के सोशल मीडिया चैनल पर भी पा सकते है। 

प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए प्रतिभागियों को इवेन्ट माइक्रोसाइट पर रजिस्टर करना होगा और अपना वीडियो भी इसी माइक्रोसाइट पर पोस्ट करना होगा।

प्रतियोगिता में शामिल प्रत्येक एंट्री को संगीत विशेषज्ञों की टीम सुनेगी और प्रत्येक भाग से सर्वश्रेष्ठ 30 प्रतिभागियों का चुनाव करेगी। सभी चुने हुए प्रतिभागी अगले राउंड जिसे बैटल राउंड नाम दिया गया है में शामिल होकर ज़ूम जैसे प्लेटफार्म पर लाइव परफॉर्म करेंगे। इस राउंड में दर्शक भी अपने चहेते गायक को वोट दे सकते है। 
90 प्रतिभागियों को 8 चरणों मे भाग लेने के बाद सर्वश्रेष्ठ 9 प्रतिभागी चुने जायेंगे। इन चुने हुए 9 प्रतिभाशाली गायकों में से प्रत्येक भाग के सर्वश्रेष्ठ गायक की घोषणा कैलाश खेर फेसबुक लाइव इवेंट में करेंगे और चुने हुए तीन गायको को अपने साथ वीडियो में गाने का निमंत्रण भी देंगे।

नॉरिश फूड के कार्यकारी निदेशक आशीष खण्डेलवाल का कहना है  नॉरिश बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ ही प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका भी मिलता रहे ऐसा हमारा सोचना है । हम भविष्य में भी ऐसी प्रतियोगिता करते रहेंगे।
कैलाश खेर ने इस मौके पर कहा मैं नॉरिश और आशीष जी को इस संगीत प्रतियोगिता के लिए बधाई देता हूँ और धन्यवाद देता हूँ कि मुझे प्रतिभाशाली गायको को सुनने चुनने का मौका दिया। मुझे उम्मीद है इस प्रतियोगिता में बच्चे और युवा गायक बड़ी संख्या में शामिल होकर अपनी प्रतिभा निखारेंगे।

एच एस सी


Saturday, September 5, 2020

यह हाथ क्या कहता है

यह जिसका भी हाथ है उसे पढ़ाई छोड़े हुए करीब 5 वर्ष हो गये है लेकिन खास बात यह है कि यह बालक फिर से पढ़ाई करेगा कोई course, अध्यात्म के प्रति रुझान, कोई धार्मिक ग्रन्थ पढ़ने की रुचि जागेगी।
पहली मुख्य रेखा देखिये इसे ह्रदय रेखा कहते है जिस अंतिम स्थान से यह रेखा मुड़ कर ऊपर गुरु पर्वत की तरफ जा रही है इसका मतलब है इसे कुछ तो पढ़ना ही है ।

अगले दो वर्षों में जिस स्थान से रेखा मुड़ी है वहाँ से एक रेखा निकल कर सीधी जायेगी। इस बालक का दिल बहुत बड़ा है मदद करने को त्तपर लेकिन जब सीधी रेखा नजर आने लगेगी उस समय  लोगो की मदद के साथ साथ यह दान दक्षिणा देने के लिए भी आगे रहेगा। 

आने वाले समय मे बालक की आमदनी सिर्फ एक कार्य से नही बल्कि अन्य कार्यो से भी होगी। इसे अचानक धन प्राप्ति भी होगी।

इसी हाथ पर चर्चा जारी रहेगी अगली post में।

Tip - हथेली में खुजली मचे तो यह न समझे कि धन आयेगा या शुभ अशुभ कुछ है बल्कि यह संकेत है कि हाथ की रेखा बदली है।

हरीश शर्मा

Tuesday, September 1, 2020

सन्तान रेखायें

हस्तरेखा ज्ञान 

सन्तान रेखा 

सन्तान रेखा के लिये आमतौर पर विशेषज्ञ चन्द्र क्षेत्र जो शुक्र क्षेत्र के सामने होता है के अंत मे देखते है लेकिन आप पहले मणि बंध के बीच मे जीवन रेखा के पास की लाइन देखे साथ ही अँगूठे की जड़ में शुक्र पर्वत और बुद्ध पर भी देखे।


तीन या कम से कम दो स्थान पर एक सी रेखा अवश्य होगी। यदि रेखा पतली और लम्बी है तो कन्या जन्म की संभावना है छोटी साफ सुथरी गहरी रेखा हो तो पुत्र की संभावना है 

तीनों या दो स्थानों पर जितनी स्पष्ट रेखायें हो उतनी ही संतान होने की संभावना होती है।

जीवन रेखा यदि शुक्र पर्वत का विस्तार करती हो तो सन्तान होने के शुभ संकेत है। 

बुद्ध क्षेत्र यानि सबसे छोटी उँगली के नीचे की रेखाएँ भी सन्तान के विषय मे जानकारी देती है। सूक्ष्म रेखाओं को मैग्निफाइंग ग्लास से देखना सटीक जानकारी देने में सहायक होता है।


दोनों हाथ देखने चाहिये जिससे रेखाओं की स्थिति साफ हो सके। 

Tip - रात को सोते समय पूर्ण दिन को धन्यवाद कहे आज का दिन बेहतर था कल का दिन बेहतरीन होगा । 

ॐ

हरीश शर्मा




Friday, August 28, 2020

शुक्र पर्वत का महत्व

हस्तरेखा ज्ञान 

शुक्र पर्वत का महत्व

हाथ में जितनी रेखाएँ है पर्वत है सब में बदलाव होते रहते है।

किसी का भी हाथ हो यह अवश्यम्भावी है। हथेली में सात पर्वत होते है। सूर्य पर्वत, चन्द्र पर्वत, मंगल पर्वत, बुध पर्वत, गुरु पर्वत, शुक्र और शनि पर्वत।

आज शुक्र पर्वत की बात करते है। शुक्र पर्वत अँगूठे के निचले भाग को कहते है। 


शुक्र पर्वत सुविकसित हो यानि न बहुत उभरा न बहुत दबा तो ऐसे व्यक्ति सुख सम्पन्नता, उत्तम स्वास्थ्य, स्त्री पुरुष के बीच समुधर संबंध होते है। संगीत कला में व्यक्ति की रुचि होती है। भावनात्मक संबंध, सरल मन विचार, दुसरो को मदद सहयोग करने वाला, भावुक होते है।

यदि शुक्र क्षेत्र विकसित न हो, सख्त हो तो व्यक्ति कठिन कार्य करने वाला होगा, साथ ही व्यभिचारी, कठोर, असंयमी और रूखा बोलने वाला होगा। ऐसे में यदि हथेली का रंग पीलापन लिए हो तो ऊपर लिखे अवगुण में इजाफा होता है।

यदि शुक्र क्षेत्र अत्याधिक विकसित हो तो व्यक्ति आराम तलब, आलसी, सैक्स के प्रति बहुत अधिक रुचि जिसके अंतर्गत वो गलत कदम उठाने से भी संकोच नही करेंगे। ऐसे में यदि हथेली का रंग लाल हुआ तो ऐसे व्यक्ति कामवासना के प्रति बहुत खतरनाक हो सकते है। 

आमतौर पर शुक्र पर्वत आकर्षक दिखने वाला व्यक्ति सौन्दर्य प्रेमी होता है किसी भी स्थान पर सौंदर्य खोज लेते है। सुविधा संपन्न जीवन प्रेमी होते है।

यदि शुक्र पर्वत पर स्पष्ट खड़ी रेखायें हो तो व्यक्ति कई विदेश यात्रायें अवश्य करेगा। आमतौर पर विदेश यात्रा के लिए चन्द्र पर्वत की रेखाओं को देखा जाता है पर मेरा अनुभव कहता है कि शुक्र पर्वत भी विदेश यात्रा के लिए महत्वपूर्ण है।


जन्मपत्री में मजबूत शुक्र हो तो व्यक्ति फैशन, पर्यटन, कम्प्यूटर, हस्तशिल्प, सिनेमा, संगीत, कला, ज्वैलर्स व्यापार, जनसंपर्क, रक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों में रोजगार या व्यापार में जाने की संभावना अधिक होती है।

Tip - सिर दर्द होने पर गर्म पानी पिये, नाक के एक छिद्र को दबाकर 15 बार फिर दूसरे छिद्र से 15 बार फिर 11 बार साधारण अनुलोमविलोम करे सिर दर्द गायब।

हरीश शर्मा

Tuesday, August 25, 2020

हस्तरेखा ज्ञान हाथ की रेखाएँ

हस्तरेखा ज्ञान 

हाथ की रेखायें

आज जानेंगे हाथ की मुख्य रेखाओं के विषय में। आमतौर पर हम सभी हाथ की चार रेखायें तो जानते ही है।

1 जीवन रेखा

2 मस्तिष्क रेखा

3 ह्रदय रेखा

4 भाग्य रेखा

इन चार महत्वपूर्ण रेखाओं के साथ 10 अन्य महत्वपूर्ण रेखाएँ होती है उनको भी जानना जरूरी है लेकिन आज हम चार रेखाओं की ही बात करते है।


1 जीवन रेखा को पितृ रेखा और कुल रेखा भी कहते है यह रेखा अँगूठे और हाथ की पहली उँगली जिसे तर्जनी कहते है के बीच से निकल कर अर्धचंद्राकार रूप लेकर हथेली के बीच से होती हुई हथेली की जड़ तक जाती है। जितनी अधिक गोलाई और साफ सुथरी जीवन रेखा उतना ही साफ सुथरा जीवन। विस्तार से फिर चर्चा करेंगे पहले रेखाएँ जान लेते है।


2 मस्तिष्क रेखा को शीर्ष और मानस रेखा भी कहा जाता है लेकिन मस्तिष्क रेखा ही प्रचलित है। यह रेखा अँगूठे और तर्जनी के बीच से जीवन रेखा के साथ निकल कर ह्रदय रेखा के नीचे और जीवन रेखा की तरफ थोड़ा सा झुकाव लिये होती है। 

जितनी सुन्दर साफ सुथरी और लम्बी मस्तिष्क रेखा होगी व्यक्ति उतना ही बुद्धिमान और शुद्ध मन होगा। विस्तार से चर्चा करेंगे


3 ह्रदय रेखा नाम से प्रचलित इस रेखा को आयु रेखा नाम भी दिया गया है। मुख्य रेखाओं में हथेली में सबसे ऊपर वाली रेखा जो सबसे छोटी उँगली के नीचे से निकल कर पहली उँगली तर्जनी के नीचे तक जाती है ह्रदय रेखा कहलाती है। रेखा की स्पष्टता देखकर आप अंदाज लगा सकते है कि हरेक ह्रदय कुछ कहता है। विस्तार से चर्चा करेंगे।


4 भाग्य रेखा जिसे शनि रेखा भी कहते है में हरेक व्यक्ति की रुचि सबसे अधिक होती है। शनि यानि कर्म, मेहनत, गाना है न जैसा  कर्म करेगा वैसा फल देगा भगवान यह है गीता का ज्ञान। भाग्य और कर्म एक दूसरे के पूरक है। लेकिन अच्छे कर्म बेहतर भाग्य बनाते है यह निश्चित है। 

विस्तार से चर्चा करेंगे प्रत्येक रेखा की उनके फल की। पहले आप सारी रेखाएँ तो समझ लीजिये।

Tip - ध्यान शुरू कीजिए बहुत आसान है सुबह उठने के बाद और रात सोने से पहले बिस्तर पर बैठ कर सिर्फ एक मिनट आँखे बंद कीजिये। आने दीजिये अच्छे बुरे विचारों को बस आँखे मत खोलिये, धीरे धीरे समय बढ़ता जायेगा विचार कम होते जायेंगे। 

शुरू कीजिये शीघ्र ही आनन्द आने लगेगा।

कल मिलते है।

नोट - सभी चित्र सौजन्य पुस्तक हस्तविचार से।

हरीश शर्मा

Sunday, August 23, 2020

हस्तरेखा ज्ञान

हस्तरेखा ज्ञान 

सामुद्रिक शास्त्र यानि हस्तरेखा वास्तव में समुद्र जितना गहरा है लिहाजा हमारा साथ लम्बा होने वाला है।

आज बात करते है हाथ की मुद्राओं की सरल आसान लाभदायक

अनामिका मुद्रा

अनामिका मुद्रा जिसे रवि मुद्रा भी कहते है। अनामिका यानि सबसे छोटी उँगली के बाद वाली उँगली उसको मोड़िये अँगूठे से दबाये हथेली के बीच मे जितनी देर आराम से दबा कर रख सके रखिये शेष उंगलियों को सीधा रखें । 


इसका लाभ होगा यदि आप tension, stress में है या मोटापा कम करना चाहते है आराम से बैठकर करिये जो लोग जमीन पर बैठ सकते है बैठकर करे नही तो जैसे कर सकते है करे जरूर, 1 मिनट 2,3,4,5,10 मिनट तक । कोशिश करे कि जिस स्थान पर करें गर्मी न हो। करने में दिक्कत महसूस हो तो न करे।

ईहा मुद्रा 

ईहा मतलब पृथ्वी भूमि जमीन मुद्रा, वज्रासन में करेंगे तो लाभ अधिक होगा नही बैठ पाये तो जैसे आसानी हो करे। अनामिका यानि सबसे छोटी के बाजू वाली उँगली और अँगूठे के tip को मिलाये बाकी उंगलियां सीधी रखे। जितनी देर आसानी से कर पाये करे लेकिन 15- 20 मिनट से अधिक न करे।


इस मुद्रा से तुतलाना, हकलाना, बोलने में संकोच होता हो, weakness हो lazy feel कर रहे हो,पाचन सही न हो में लाभ मिलता है।

जीवन मुद्रा 

जीवन यानि प्राण, life इस मुद्रा में आराम से बैठ जाये जमीन पर या जहाँ सुविधा हो। कनिष्ठ यानि सबसे छोटी और अनामिका मतलब उसके बाजू वाली अब इन दोनों उँगली को मिला ले और अँगूठे से दोनों उँगली के नाखून वाले भाग को हल्के से दबाये, बाकी दोनों उँगली सीधी रखे।


Heart blockage, आँखों के रोग, concentration करने में परेशानी हो, भूख पर नियंत्रण न हो तो यह मुद्रा करे तो लाभ मिलेगा।

Tip - पहले दिन मैंने सलाह दी थी 11 बार ॐ और अनुलोम करने की उसमे यह जोड़ लीजिये कि रात को दोनों प्रक्रिया करते समय वज्रासन में बैठ कर करिये इससे अतिरिक्त लाभ होगा पाचन क्रिया सही रहेगी साथ ही एकाग्रता में विकास होगा।

हरीश शर्मा

Saturday, August 22, 2020

हस्तरेखा ज्ञान


हस्तरेखा ज्ञान 
आज बात करते है हाथ के अँगूठे की -

1- कुछ लोगो के अँगूठे पीछे नही मुड़ते है ऐसे लोग जो निश्चित कर लेते है वही final होता है वो किसी की नही सुनते। कुछ हद तक जिद्दी होते है।

ऐसे लोग अपने निर्णयों पर स्थिर रहते है अधिकतर इनके निर्णय सही भी होते है। यह लोग किसी से गुस्सा हो जाये तो बहुत समय तक नाराज रहते है। बहुत मुश्किल से माफ करते है। 

2- कुछ लोगो के अँगूठे लचीले होते है आसानी से पीछे मुड़ जाते है ऐसे लोग खुद को कही भी बहुत जल्दी adjust कर लेते है। किसी से नाराज हो जाये तो बहुत जल्द भूल जाते है। समझदार होते है लोग इनकी बात सुनते है अमल करते है।

ऐसे लोग किसी की सलाह आसानी से मान जाते है यानि दृण निश्चयी नही होते है भावुक होते है अपनी कमी और गलतियों को स्वीकारने वाले होते है।

3- कुछ लोगो के अँगूठे होते ही पीछे है लचीले इतने कि कितना ही मोड़ लो फ़ोटो में देखे । 

ऐसे लोगो का गुस्सा कपूर की तरह है तुरन्त उड़ जाता है। गुस्सा कम आता है लेकिन जब आता है तो कुछ मिनट इन्हें संभालना कठिन होता है लेकिन कुछ देर में यह शान्त हो जाते है और अपने गुस्से पर अफसोस जाहिर करते है।

यह लोग भावुक होते है इनके पास पैसा है तो बिना सोच विचार के किसी की भी मदद कर सकते है। दयालु होते है किसी तरह की कोई जोर जबरदस्ती नही करते।

काम के प्रति लापरवाह होते है लेकिन एक बार निश्चय कर लिया तो काम को अन्जाम देकर ही दम लेते है।


4- कुछ लोगो के अँगूठे बीच से पतले होते है और नाखून वाला हिस्सा चौड़ा होता है 

ऐसे लोग की बुद्धि तेज होती है। प्रतिभाशाली होते है। सीखने की प्रवृत्ति तेज होती है भविष्य के प्रति अधिक सजग होते है।

किसी को भी ईमानदारी से सलाह देते है और लोग इनकी सलाह को मानकर लाभ भी उठाते है। गुस्सा इनका खतरनाक होता है खुद को भी चोट पहुँचा सकते है। 

5- नाखून वाला भाग मोटा देखने मे अजीब लगता है यह लोग कम बोलते है गुस्से में क्या कुछ कर जाये कहा नही जा सकता। किस के प्रति क्या दुर्भावना लेकर बैठे है कहना मुश्किल है। 

यह लोग अपनी बात किसी से नही कहते न किसी की सलाह लेते न देते सिर्फ action में विश्वास करते है । लोग ऐसे लोगो से दूर रहना ही पसंद करते है।

यह लोग किसी पर भरोसा कर ले तो उसके लिये कुछ भी कर सकते है कुछ भी मतलब कुछ भी।


Tip- सुबह उठ कर अवश्य बोले आज मेरा दिन शुभ हो।

कल मिलते है।